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Sunday, December 24, 2017

Tiger jinda hai the protest of the movie, About the opposition of films in India : टाइगर जिन्दा है फिल्म का किया विरोध जानिए भारत में फिल्मों के विरोध के बारे में

भारतीय संविधान के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता  सबको है लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में यह ध्यातव होना चाहिए कि किसी दूसरे का अहित न हो. अर्थात जहां पर आपकी स्वतंत्रता किसी अन्य की स्वतंत्रता का हनन करती हो वहां आपकी स्वतंत्रता स्वत: ही समाप्त हो जाती है. अतः अपने लाभ के लिए किसी दूसरे का अहित करना न तो व्यवहारिक रुप से और न ही सामान्यतः ही उचित है और न ही इस तरह की बात को भारतीय संविधान तरजीह देता है. लेकिन इतिहास गवाह है की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता  पर अनेक बार ताले लगें हैं, फिर चाहे वह आपातकाल में अखबारों का प्रतिबंध हो या नाटकों का या फिल्मों का या उसके बाद अनेक साहित्यिक कृतियों का या कलात्मक कार्यों का. जहाँ तक मुझे लगता है इस विरोध के पीछे अपने अस्तित्व के खतरे को भांप कर उसे बचाने की कवायत होती है. समाज, देश तथा मनुष्य के हित एवं नुकशान बाद में होते हैं या अनेक जगह होते ही नहीं हैं. आईए जानते हैं फिल्मों को लेकर भारत में किए गए इसी तरह के विरोध के बारे में.
हाल ही में ‘पद्मावती’ फिल्म को लेकर पहले राजस्थान के राजपूत संगठनों के द्वारा एवं बाद में धीरे-धीरे संपूर्ण भारत में राजपूत समाज एवं अन्य लोगों के द्वारा इसका विरोध किया गया. इसी तरह ‘टाइगर जिंदा है’ फिल्म को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस)  एवं शिवसेना ने विरोध करना प्रारंभ कर दिया. शिवसेना एवं मनसे का विरोध टाइगर जिंदा है को लेकर पद्मावती जैसा विरोध नहीं है. टाइगर जिंदा है की कहानी, नायक, नायिका, संवाद या किसी विशेष तथ्य को लेकर उसका विरोध नहीं हो रहा है. उसके विरोध का जो कारण बताया गया है वह है यह फिल्म 22 दिसंबर को रिलीज हुई है और इसी दिन रिलीज हुई है मराठी भाषा में बनी फिल्म ‘देवा’. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख नेता राज ठाकरे ने मुंबई के सिनेमाघर मालिकों को एक धमकी भरा पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने कहा है कि यदि मराठी फिल्म 'देवा' को प्राइम टाइम में नहीं दिखाया गया तो वे लोग 'टाइगर जिंदा है' फिल्म को किसी भी सिनेमाघर में नहीं चलने देंगे। 

इन दोनों ही दलों का कहना है कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. चाहे वह किसी भी रुप में हो. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे के अनुसार, 'सलमान की फिल्म टाइगर जिंदा है की वजह से देवा को सिनेमाघरों में जगह नहीं मिल रही है। ऐसी स्थिति में अगर महाराष्ट्र में ही मराठी फिल्मों को जगह नहीं दी जाएगी तो हम यहां पर कोई भी हिन्दी फिल्म चलने नहीं देंगे।' मनसे की नेता शालिनी ठाकरे ने मीडिया को बताया की, 'मराठी फिल्मों को प्राइम टाइम शोज मिलने चाहिए। मराठी फिल्म 'देवा' को 'टाइगर जिंदा है' के मुकाबले स्क्रीन स्पेस नहीं दिया जा रहा था।’ इन दोनों ही संगठनों का मानना है कि इस तरह से मराठी भाषा की अनदेखी करना उसका अपमान है. अब सवाल यह है की यह विरोध उचित है या अनुचित? भारत में इस तरह से सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, जातिगत एवं लिंग के आधार पर फिल्मों का विरोध होता रहा है.
मोटा मोटी रुप से देखा जाए तो फिल्म उद्योग एक मनोरंजन का माध्यम है लेकिन थोड़ा सा बारीकी से देखा जाए तो मात्र मनोरंजन का कार्य फिल्में नहीं करती हैं. जहां तक मेरा दृष्टिकोण है मनोरंजन करना फिल्मों का द्वितीय कार्य है बल्की प्राथमिक कार्य देश एवं समाज तथा मानवीय भावनाओं को प्रेरित एवं विकसित करने में किसी भी प्रकार का संदेशात्मक योगदान कलात्मक माध्यम से देना प्राथमिक कार्य है. इसीलिए फिल्में ऐतिहासिक संदर्भ तथा यथार्थ घटनाक्रमों को लेकर के किसी व्यक्ति विशेष या समुदाय विशेष पर अक्सर बनाई जाती है और विशिष्ट रुप से सामाजिक व राजनीतिक रुप से पिछड़े हुए किसी विशेष तबके या वर्ग को लेकर के फिल्म बनाने के पीछे फ़िल्मकार का उदेश्य समाज में एक चेतना जागृत करना होता है. ऐतिहासिक, धार्मिक या राजनीतिक संदर्भ को लेकर के फिल्म बनाने का मकसद किसी का अहित करना नहीं है और न ही यह किसी वर्ग विशेष की भावनाओं को आहत करना है बल्कि उसके पीछे उस पक्ष, वर्ग या सोच की, उन्नति की एवं संदेश की भावना निहित होती है. हालाँकि यह भी सच है की आजकल अनेक फ़िल्मकार समाज या देश हित के बारे में बाद में सोचते हैं अपने मुनाफे के बारे में पहले सोचते हैं. इसलिए अनेक फ़िल्मकार फ़िल्में मुनाफे के लिए बनाते हैं. इस तरह का सिनेमा वास्तव में मात्र मनोरंजन देता है और कुछ नहीं. क्योंकि ऐसे लोग व्यवसायिक दृष्टि से हो सोचते हैं.

लेकिन अनेक कारणों से कुछ संगठन, वर्ग या राजनीतिक दल के लोगों के द्वारा फिल्मों का विरोध किया जाता है. जिनके कारण कई बार तो विरोध की हुई फिल्में अक्सर रुचि पैदा करती है और लोग उसे अधिक देखने को उत्साहित होते हैं और वह जब भी प्रसारित होती है जबरदस्त हिट हो जाती है. समसामयिक संदर्भों को ध्यान में रखते हुए कई बार तो विरोध किसी राजनीतिक व सामाजिक संगठनों के द्वारा या विशेष वर्ग के द्वारा पूर्व नियोजित तरीके से करवाया जाता है और इस तरह का विरोध अक्सर फिल्म के प्रति लोगों का उत्साह जगाता है और ऐसी फिल्में जब प्रसारित होती हैं तो हिट होती है लेकिन कई बार यह विरोध समसामयिक संदर्भ को देखकर तत्कालीन रुप से किया जाता है लेकिन इसके विरोध में अक्सर कोई संगठन, कोई दल या विशेष वर्ग अपना हित महसूस करता है, तभी वह विरोध जताता है. लेकिन पूर्ण रूप से किसी फिल्मकार के द्वारा उस वर्ग विशेष का अहित करना फिल्म निर्माण के पीछे उसका मकसद नहीं होता है. कुछ अपवादों को छोड़ दे तो.
‘टाइगर जिंदा है’ फिल्म में किसी वर्ग विशेष या राजनीतिक दल के ऊपर किसी तरह की टिप्पणी नहीं है. लेकिन फिर भी इसका विरोध किया जा रहा है. इससे पूर्व भारत में अनेक ऐसी फिल्में रही हैं, जिनका विरोध किया गया है. जैसे कि गुजरात दंगों के ऊपर बनी फिल्म ‘परजानिया’. जिसमें नसीरुद्दीन शाह ने काम किया था एवं राहुल ढोलकिया ने इस फिल्म का निर्देशन किया था. ‘फायर’. दो बहनों के शरीरिक संबंध पर बनी फिल्म ‘फायर’ दीपा मेहता के निर्देशन में बनी थी. इसका विरोध किया गया था. हिंदी साहित्य के यशस्वी उपन्यासकार कमलेश्वर के उपन्यास ‘आंधी’ पर बनी इमरजेंसी की घटनाक्रमों को लेकर इसी नाम से बनी फिल्म ‘आंधी’ का विरोध किया गया था. अमृत नाहटा के बेहद ही चर्चित कथानक ‘किस्सा कुर्सी का’ की स्क्रिप्ट को उन्होंने स्वयं निर्देशित करके ‘किस्सा कुर्सी का’ नाम से फिल्म बनाई. यह भी आपातकाल के घटनाक्रमों के ऊपर आधारित फिल्म थी, इसका भी विरोध किया गया. बाद में इसे नाटक के रूप में अमृत नाहटा ने प्रकाशित करवाया. मीरा नायर की फिल्म ‘कामसूत्र’ का विरोध किया गया. बेहद उत्तेजक दृश्यों के कारण इस फिल्म का विरोध किया गया. अनुराग कश्यप की फिल्म ‘पांच’ जोकि साइको थ्रिलर और बेहद उत्तेजक दृश्यों के कारण प्रतिबंधित हो गई. हुसैन जैदी के उपन्यास ‘मुंबई ब्लास्ट’ पर आधारित अनुराग कश्यप की फिल्म ‘ब्लैक फ्राइडे’ सेंसिटिव मुद्दे के कारण प्रतिबंधित हो गई. इस तरह से प्रतिबंध होने वाली फिल्मों की एक लंबी फेहरिस्त है. समय-समय पर अनेक विषयों को लेकर एवं अनेक कारणों से फिल्मों का विरोध किया गया है और उन्हें प्रतिबंधित किया गया है. काशीनाथ सिंह के उपन्यास ‘काशी का अस्सी’ के अंदर बनारस की संस्कृति एवं वहां की यथार्थ स्थिति को दिखाने का प्रयास करने वाली सनी देओल अभिनीत फिल्म ‘मोहल्ला अस्सी’ भी पहले प्रतिबंधित कर दी लेकिन संभवत अब शायद रिलीज हो जाए.
इस तरह से फिल्मों को प्रतिबंधित करना उचित नहीं है. क्योंकि फिल्मों में उचित या अनुचित गलत एवं सही तथा समाज के लिए जो हानिकारक है उसे देखने के लिए एक सेंसर बोर्ड नाम की बॉडी बनाई गई है. जिसमें अनेक क्षेत्रों से जुड़े हुए बौद्धिक लोग हैं जो फिल्म को रिलीज करने से पहले उसको अनेक पहलुओं से देखते हैं. उसका निरीक्षण करते हैं और उसके बाद ही किसी विशेष वर्ग या श्रेणी में रखते हुए उसे प्रसारित करने की अनुमति देते हैं. अतः सीधा-सीधा फिल्म का विरोध न किया जाए बल्कि यदि किसी व्यक्ति विशेष समाज और समुदाय को किसी विशेष फिल्म से आपत्ति भी है तो है सर्वप्रथम सेंसर बोर्ड को लिखित में यह संज्ञान लेने के लिए कहें कि ‘इस फिल्म में इस तरह की स्थितियां हैं, अतः इसे गंभीरता से देखा जाए, उसके बाद ही रिलीज किया जाए’. यह एक संवैधानिक तरीका हो सकता है और ऐसा ही होना चाहिए.

Saturday, December 23, 2017

Tiger jinda hai film's copy of this movie : टाइगर जिन्दा है फिल्म इस फिल्म की है नकल

सलमान खान एवं कैटरीना कैफ स्टारडम फिल्म टाइगर जिंदा है इस साल की बहुप्रतीक्षित फिल्म मानी जाती है. अली अब्बास जफर के निर्देशन में बनी हुई यह फिल्म कबीर खान के निर्देशन में बनी फिल्म ‘एक था टाइगर’ का एक तरह से सीक्वेल है और एक साऊथ फिल्म का रीमेक.
टाइगर जिंदा है फिल्म के गाने बेहद लोकप्रिय हो चुके हैं और इंटरनेट पर 24 घंटे में सबसे अधिक देखे जाने वाले गानों का रिकॉर्ड बना चुके हैं. इस फिल्म की कहानी में आईएसआईएस आतंकवादियों के चंगुल में इराक में 25 भारतीय नर्स फंस गई हैं जिन्हें टाइगर अपने दम पर इन आतंकवादियों से छुड़ाता है. इसी के इर्द गिर्द यह सारा घटनाक्रम चलता है. लेकिन आपको बता दें कि टाइगर जिंदा है से पहले इसी घटना पर एक मलयालम फिल्म बन चुकी है जिसका नाम है ‘टेक ऑफ’. महेश नारायणन के निर्देशन में बनी इस मलयालम फिल्म ‘टेक ऑफ’ में पार्वती एवं फहद फैसिल ने बेहद खूबसूरत अभिनय किया है.

टाइगर जिंदा में नर्सों को बचाने में स्वयं टाइगर अर्थात सलमान खान अपने दम पर यह कारनामा करते हैं और कैटरीना कैफ का सहयोग भी इस काम में उन्हें मिलता है. जबकि टेक ऑफ में नर्सों को बचाने के मामले को राजनीतिक रुप से सुलझाया जाता है. दोनों ही फिल्मों में आतंकवादियों को इराक का दिखाया गया है. आईएसआईएस एजेंट आतंकवादी इराक के अंदर नर्सों का किडनैप करके बैठे हुए हैं. टेक ऑफ फिल्म की हिरोईन पार्वती जो कि मलयालम फिल्म इंडस्ट्री की एक बहुत ही चर्चित और बड़ी अभिनेत्री है ने इस फिल्म में समीरा का रोल किया है. वह इस फिल्म में एक नर्स बनी है और वह आतंकवादियों के चंगुल में फंस जाती है. उनके पति मनोज राजनीतिक रूप से उन्हें बचाते हैं.
जबकि टाइगर जिंदा है में सलमान खान स्वयं अपने दम पर नर्सों को छुड़ाने का कार्य करते हैं. टेकऑफ मलयालम में रिलीज होने से पहले बहुप्रतीक्षित फिल्म रही है जिस तरह से टाइगर जिंदा है की रिलीज से पहले बहुप्रतीक्षित रही है. विशेष बात यह है कि 'टेक ऑफ' फिल्म के निर्माता –निर्देशक इस फिल्म का हिंदी संस्करण भी बनाने वाले थे लेकिन उससे पहले अली अब्बास जफर टाइगर जिन्दा है फिल्म की कहानी वैगेरा को लेकर काफी काम कर चुके थे और उन्हें पता लगते ही यशराज कैंप ने 'टेक ऑफ' के निर्माता निर्देशक को रोक लिया। टेक ऑफ के हिंदी संस्करण के लिए जेट एयरवे ने फाइनेंस करने का विचार भी बना लिया था। लेकिन बाद में फिल्म के हिंदी संस्करण को बंद करवा दिया गया।


दोनों ही फिल्म का कथानक एक जैसा है लेकिन अब देखना यह है टाइगर जिंदा है फिल्म जिस तरह से दर्शकों का इंतजार करवा रही थी क्या उनके इंतजार पर वह खरा उतरती या नहीं.

Friday, December 22, 2017

Do you know that these special secrets related to the movie Tiger jind hai : क्या आप जानते हैं टाइगर जिंदा है फिल्म से जुड़े इन खास सीक्रेट्स को

साल 2017 की बहुप्रतीक्षित फिल्म है टाइगर जिंदा है. यह फिल्म 22 तारीख को रिलीज हो गई है. सलमान खान की फिल्में अक्सर ईद पर रिलीज होती है लेकिन अब की बार ईद पर नहीं यह फिल्म क्रिसमस के त्यौहार पर रिलीज हुई. आइए जानते हैं इस फिल्म से जुड़े हुए इसके कुछ खास सीक्रेट्स.
रेडियो जोकि ने लिखी है फिल्म की कहानी
टाइगर जिंदा है फिल्म की कहानी को लिखने में इसके निर्देशक अली अब्बास जफर का साथ दिया है रेडियो के फेमस आर्टिस्ट नीलेश मिश्रा ने. नीलेश मिश्रा रेडियो पर ‘यादों का इडियट बॉक्स’ कार्यक्रम में बहुत ही अनोखी और खूबसूरत अंदाज में कहानियां सुनाते हैं. वे कहानियां लिखते भी हैं. ‘शुभ मंगल सावधान’ फिल्म में भी उन्होंने अपनी आवाज का जादू बिखेरा है.

सलमान खान ने किया वजन कम
टाइगर जिंदा है फिल्म के लिए सलमान खान ने अपना वजन 18 किलो कम किया है. बहुत ही खूबसूरत एक्शन और सभी को चौंका देने वाली सलमान खान की फिटनेस का जादू इस फिल्म में दिखाई देगा.
सलमान खान ने नहीं ली फीस
किसी भी फिल्म में सलमान खान को लेना सबके बस की बात नहीं है. क्योंकि इन दिनों हिंदी सिनेमा जगत के सबसे महंगे कलाकरों में से एक हैं सलमान खान. टाइगर जिंदा है फिल्म के लिए सलमान खान ने फीस नहीं ली. सलमान खान फिल्म के सैटेलाइट राइट्स और फिल्म के प्रॉफिट में से मुनाफा लेंगे.
बड़े बजट की फिल्म
टाइगर जिन्दा है फिल्म का बजट बहुत अधिक है. सैटेलाइट राइट्स और फिल्म के प्रॉफिट के हिसाब से लगभग 70 करोड तो सलमान खान ही ले लेंगे. इस फिल्म को लगभग 140 करोड रुपए में बनाया गया है. 25 करोड़ का खर्च इसके प्रचार में लगा है, तो इस तरह से कुल खर्चा 165 करोड़ के आसपास है.
रियल मिलिट्री इक्विपमेंट्स
जबरदस्त एक्शन, ड्रामा और रहस्य से भरपूर इस फिल्म को वास्तविकता से जोड़ने के लिए इसमें रियल मिलिट्री इक्विपमेंट्स का प्रयोग किया गया है. जिनका वजन लगभग 30 किलो के आसपास है. चापर्स भी उन्हें के इस्तेमाल किए हैं.  
विश्व के 100 से अधिक डांसर
इस फिल्म का स्वर्ग से स्वागत गाना जबरदस्त हिट हो चुका है. इस गाने में दुनिया भर के 100 से ज्यादा हिप-हॉप डांसरों को दिखाया गया है. इस बहुत ही खूबसूरत गाने की शूटिंग ग्रीस में हुई है और ग्रीस के लोकल लोगों को भी इस गाने में दिखाया गया है.
5 देशों में हुई शूटिंग
टाइगर जिन्दा है फिल्म की शूटिंग एक नहीं बल्कि पांच देशों में हुई है. भारत, अबू धाबी, आस्ट्रिया,  मोरोक्को और गिरीश में टाइगर जिंदा है फिल्म की शूटिंग की गई है.
इस फिल्म का विलेन है विदेशी एक्टर
टाइगर जिंदा है फिल्म में मुख्य खलनायक की भूमिका निभाने वाले सजाइद देलाफ्रुज ईरान के एक्टर हैं. इससे पूर्व वे ‘बेबी’ नाम की हिंदी फिल्म में भी नजर आ चुके हैं. इसके अलावा हॉलीवुड फेमस स्टैंड डायरेक्टर टॉम स्टूथर्स ने इस फिल्म के स्टेंट सीन डायरेक्ट किए हैं.

Thursday, December 21, 2017

10 films of 2017 that were budget less but remained in the movie : 2017 की ऐसी 10 फिल्में जिनका बजट रहा कम लेकिन फिल्म में रहा दम

बॉलीवुड के लिए साल 2017 उथल-पुथल भरा रहा. एक तरफ जहां अनेक बड़े स्टारों की तथा बड़े बजट की फिल्में फ्लॉप रहीं, वहीं दूसरी ओर छोटे बजट की एवं छोटे स्टारों की फिल्मों ने दर्शकों के दिल पर राज किया और बॉक्स ऑफिस पर भी कमाल किया. कई फिल्में विमर्शात्मक रूप से अनेक मुद्दों पर सोचने के लिए मजबूर करने वाली रही. भावनात्मक एवं सामाजिक रुप से अनेक सवाल कुछ फिल्मों ने उठाए. इस तरह की फिल्मों के निर्माता निर्देशकों ने निश्चित रूप से मनोरंजन से परे सामाजिक सरोकार को भी सिनेमा से जोड़ने की कोशिश की. छोटे बजट से तैयार की हुई इन कुछ फिल्मों ने साल 2017 में वह कमाल कर दिखाया जो बॉलीवुड के कई सुपरस्टार एवं बड़े निर्देशकों के बैनर तले बनी हुई बड़े बजट की फिल्में भी नहीं कर पाई. इन लो बजट की फिल्मों ने समीक्षकों का ध्यान तो अपनी ओर खींचा ही, साथ ही दर्शकों को भी अपने से जोड़ने में ये कामयाब रहीं और निश्चित रुप से आम दर्शकों का इस तरह की फिल्मों से जुड़ना, यह एक बड़ी उपलब्धि है. क्योंकि इस तरह की फिल्मों को बेहतरीन सिनेमा पारखी आलोचक तो मिल जाते हैं किंतु आम दर्शक नहीं. क्योंकि जिस तरह की फिल्मों का एवं स्टारडम का आजकल ट्रेंड है उसमें इस तरह की फिल्मों कों दर्शक मिलना नि:संदेह आज के तथाकथित आधुनिक दौर में चुनौती के साथ-साथ एक बेहतरीन बौद्धिकता और चिंतन की परिकल्पना की परिपाटी का साकार होना सा लगता है. साल 2017 लगभग अपने अंतिम पड़ाव पर है बॉलीवुड के हिसाब से क्या अच्छा, क्या बुरा हुआ इसका हिसाब किताब करना जरूरी है तो आइए हम आपको बताते हैं कि इस साल की ऐसी 10 फिल्में जिनका बजट तो कम रहा लेकिन फिल्म में दम रहा.
शुभ मंगल सावधान
आयुष्मान खुराना और भूमि पेडणेकर की खूबसूरत जोड़ी के दमदार अभिनय एवं इस फिल्म की खूबसूरत पटकथा को लोगों ने बहुत पसंद किया. आर एस. प्रसन्ना के निर्देशन में बनी इस फिल्म का बजट 25 करोड़ था और इसका बॉक्स ऑफिस लगभग  64.5 करोड़ रहा. शुभ मंगल सावधान एक तमिल फिल्म की रीमेक फिल्म है. सगाई के बाद और शादी से पहले एक लड़का और लड़की अपने जीवन के अनेक छोटे छोटे पहलुओं से लेकर के और संभोग तक के मुद्दों पर खुलकर चर्चा करते हुए इस फिल्म में दिखाए गए हैं. यह निश्चित रूप से इस तरह का विषय है जो किसी फिल्म की पटकथा का हिस्सा पहली बार बना है और बड़ा ही चिंतनीय विषय है.
लिपस्टिक अंडर माई बुर्का
अलंकृता श्रीवास्तव के निर्देशन तथा कोंकोना सेन शर्मा, रत्ना पाठक, अहाना कुमरा, प्लाबिता बोरठाकर के अभिनय से सजी यह फिल्म मुख्यतः महिलाओं के इर्द-गिर्द घूमती हुई कहानी पर आधारित है. अलग-अलग समाज, वर्ग एवं उम्र की महिलाओं के साथ अनेक तरह के बंधन एवं आजादी के संदर्भ भारतीय परिवेश में देखने को मिलते हैं. इस फिल्म में स्त्रियों के अनेक अंतरंग एवं बेसिक मुद्दों को बहुत ही अनोखे रूप से उठाया गया है. हालांकि सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को पहले बैन कर दिया था लेकिन बाद में न्यायालय की दखल से यह फिल्म रिलीज हो पाई. इस फिल्म का बजट 12 करोड़ रहा जबकि इसकी कुल कमाई 26.6 रही. 


तुम्हारी सुलु
सुरेश त्रिवेणी के निर्देशन में बनी एक हाउसवाइफ की आम जिंदगी की कहानी को दर्शाती यह फिल्म अनेक सवाल खड़ा करती है. विद्या बालन, नेहा धूपिया एवं मानव कोल के अभिनय से सजी हुई इस फिल्म में एक हाउसवाइफ का आर. जे. बनना और उसके बाद उसके पारिवारिक जीवन में अनेक बदलावों का आना, यह दिखाया गया है. लोगों ने इसे खूब पसंद किया. लगभग 17 करोड़ की लागत से बनी इस फिल्म ने अभी तक 30 करोड़ की कमाई कर ली है.
करीब करीब सिंगल
तनुजा चंद्रा के निर्देशन एवं इरफान खान और साउथ की एक्ट्रेस पार्वती के अभिनय की यह बहुत ही खूबसूरत और एक सच्ची प्रेम घटना पर आधारित फिल्म है. जिसे लोगों ने बहुत पसंद किया. इरफान खान की एक्टिंग तो रियल लगती ही है, इस फिल्म में उनका रोमांस की बहुत रियलिस्टिक लगा. दर्शकों ने इसे खूब कुबूल किया. इसकी कुल 22.5 करोड़ की कमाई है जबकि लागत 8 करोड़ के आस पास है.
न्यूटन
राजकुमार राव एवं अंजली पाटिल अभिनीत फिल्म न्यूटन जबरदस्त चर्चित रही. यह फिल्म ऑस्कर के लिए नामांकित भी हुई. एक नक्सलग्रस्त आदिवासी ग्रामीण परिवेश में एक ईमानदार अफसर की ड्यूटी वोटिंग करवाने में लगती है तो क्या क्या परिस्थितियां वहाँ पनपती हैं, इसी स्थिति को बेहद रोमांचक ढंग से निर्देशक ने इस कहानी में बयां किया है. राजकुमार राव की बेहद खूबसूरत अदाकारी को लोगो ने बहुत पसंद किया. अमित वी मसूरकर के निर्देशन में बनी इस फिल्म की कुल लागत 9 करोड़ रही जबकि इसका कुल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 31.6 करोड़ रहा.
मुक्ति भवन
इस साल की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक है मुक्ति भवन. शुभाशीष भूटियानी के निर्देशन में बनी फिल्म मुक्ति भवन रिश्तों के साथ जिदगी की भी गांठे खोलती है. आम जिंदगी के अनेक अनछुए पहलू, सवाल एवं उनकी अनसुलझी गुत्थियों को उठाने वाली यह फिल्म सामाजिक सरोकारों से लेकर मानवीय संवेदना के उस धरातल तक सोचने को मजबूर करती है, कि किस तरह से एक व्यक्ति जिंदगी से लेकर के मौत तक का सफर तय करता है और उसमें क्या-क्या तकलीफें एवं बेचैनी उसे होती है. इन सब मुद्दों को इस फिल्म में बहुत ही खूबसूरती के साथ बयां किया है. आदिल हसन, ललित बहल, पलोमी घोष, गीतांजली कुलकर्णी के बेहद संजीदा और खूबसूरत अभिनय से इस फिल्म ने बेहद लोकप्रियता हासिल की. लगभग 4.5 करोड़ की लागत से बनी इस फिल्म की कुल कमाई 10.4 करोड़ रही.
कड़वी हवा
संजय मिश्र, तिलोतमा शोमे, रणवीर शोरी स्टारडम फिल्म कड़वी हवा के निर्देशक नील माधव पंडा हैं. नाम के अनुरूप यह फिल्म एक कड़वी सच्चाई को बयां करती है, जो सचमुच बहुत कड़वी है, जो न खाई जा सकती है और न निगली जा सकती है, यह एक बहुत बड़ा सच है. गरीबी, अकाल, सूखा, महामारी, बीमारी, तंगहाली इन सब मुद्दों का एहसास कराती यह फिल्म वक्त की जरूरत के अनेक सवाल खड़ा करती है.
अनारकली ऑफ आरा
एक आम नाचने वाली स्त्री के जीवन की अनेक सच्चाइयों को बयां करती हुई यह कहानी कस्बाई इलाकों में प्रतिष्ठित लोगों के द्वारा किए जाने वाला व्यवहार एवं व्यभिचार प्रकट करती है. स्वरा भास्कर एवं संजय मिश्र की बेहतरीन भोजपुरी संवाद अदायगी एवं अदाकारी ने इस फिल्म को काफी चर्चित किया. अविनाश दास के डायरेक्शन में बनी यह फिल्म निश्चित रूप से बेहद ही खूबसूरत है. अनारकली ऑफ आरा का कुल बजट रहा 5 करोड़ और इस फिल्म ने कमाई की 15 करोड़ की.

ए डेथ इन द गंज
इस साल की बेहतरीन फिल्मों में से एक यह फिल्म रही है. अनेक तरह की मनुष्य की सोच के ऊपर सवाल उठाने के साथ-साथ विचारों की गुफाओं में विविध प्रकार की तरंगे जब मन और मस्तिष्क में उठने लगती है तो बेचैनी के साथ-साथ एक अनोखी स्थिति मनुष्य की हो जाती है, इसी तरह की कहानी के ताने बाने से बनी हुई यह फिल्म कोंकणा सेन शर्मा के पहली बार के बेहतरीन निर्देशन की एक बेहतरीन फिल्में है. ओम पुरी, विक्रांत मस्सी, कल्कि कोचलिन, गुलशन देवैया, तिलोत्तमा शोम आदि कलाकारों ने इस फिल्म में बहुत ही शानदार भूमिकाएं की. इस फिल्म ने नेशनल अवार्ड भी जीता. 8 करोड़ की लागत से बनी इस फिल्म का बोस ऑफिस 12 करोड़ रहा.
ट्रैप्ड
विक्रमादित्य मोटवानी द्वारा निर्देशित इस फिल्म में राजकुमार राव एवं गीतांजली थापा ने मुख्य भूमिका निभाई है. खाली बिल्डिंग के एक फ्लैट में फंसे हुए एक युवक की कहानी पर आधरित है यह फिल्म. प्रत्येक मनुष्य की जिंदगी की अनेक परेशानियों एवं उसका दृष्टिकोण किस प्रकार से उसे सोचने के लिए विवश करता है इसी तरह की मानसिक उहापोह के मध्य चलती हुई इस फिल्म की कहानी बेहद रोचक और द्वंदात्मक स्थिति पैदा करती है. राजकुमार राव के शानदार अभिनय एवं इस फिल्म के कथानक को लोगों ने बहुत पसंद किया.

Wednesday, December 20, 2017

Heroine over heroes in the year 2017 : साल 2017 में छाई हीरो से अधिक हीरोइन

2017 बहुत जल्दी ही अलविदा कहने वाला है. चंद दिन ही इस वर्ष में शेष बचे हैं. उसके बाद एक नया वर्ष नए कैलेंडर के साथ सामने आएगा. बॉलीवुड के लिए यह वर्ष काफी उतार चढाव भरा रहा. बडे बड़े सितारों की फिल्में जहाँ बॉक्स ऑफिस पर लुढ़क ग वहीँ छोटे सितारों की एवं छोटे बजट की फिल्में चमक गई.
लेकिन विशेष बात यह रही कि इस वर्ष फिल्मों में मेल के बजाय फीमेल आधारित फिल्में अधिक प्रसिद्धि प्राप्त कर पाई. चाहे वो सीक्रेट सुपरस्टार हो या तुम्हारी सुलु. हिंदी सिनेमा में इस वर्ष ऐसी कई फिल्में आईं जिनकी हीरो नायिकाएं रही.
बॉलीवुड में देखा जाता है कि फीमेल लीड वाली फिल्में अधिक पसंद नहीं की जाती हैं. लेकिन विद्या बालन की डर्टी पिक्चर के बाद यह ट्रेंड बदला है और विद्या बालन अभिनीत कहानी एवं कहानी 2 दर्शकों ने खूब पसंद की. इसी तरह से इस वर्ष भी फीमेल लीड वाली फिल्में अधिक प्रभावी रही है. आइए देखते हैं इस वर्ष की चुनिंदा नायिका प्रधान फिल्मों की एक सूची.
सिमरन
कंगना रनौत अभिनीत इस फिल्म ने दर्शकों का एवं विशेष रूप से आलोचकों का अपनी ओर ध्यान बहुत खींचा. कंगना राणावत की बहुत ही स्वाभाविक एक्टिंग एवं उनका खूबसूरत अंदाज लोगों ने इसमें खूब पसंद किया.
सीक्रेट सुपरस्टार
एक मां बेटी की ऐसी कहानी जो स्त्री विमर्श के अनेक पहलुओं को छूती हो और जिसके अंदर अपनी जिंदगी के मायने समाज की दकियानुसी सोच के अंदर तलाशे जाते हों, को इस फिल्म में दर्शाया गया. एक लड़की के संगीत के जुनून का एक वीडियो यूट्यूब पर वायरल होना और अपना नाम छुपा कर सीक्रेट सुपरस्टार के नाम से प्रसिद्धि प्राप्त करना, इस कहानी में जायरा वसीम को लोगों ने खूब पसंद किया. यह फिल्म आमिर खान के प्रोडक्शन में बनी.
तुम्हारी सुलु
विद्या बालन अभिनीत तुम्हारी सुलु, विवाह के बाद एक आम हाउसवाइफ का नाईट आर जे बनना और उसके बाद पारिवारिक माहौल में किस तरह का प्रभाव होना यह लोगों ने खूब पसंद किया. तुम्हारी सुलु में विद्या बालन.. नेहा धूपिया और मलिष्का को लोगों ने खूब पसंद किया.
नाम शबाना
खुफिया एजेंट बनी तापसी पन्नू की एक दमदार भूमिका जिसमे जबरदस्त एक्शन भी था, इसे लोगों ने खूब पसंद किया. यूँ तो इस फिल्म में अक्षय कुमार एवं मनोज वाजपेय जैसे बड़े पुरुष अभिनेता भी थे लेकिन तापसी पन्नू का रोल मुख्य था एवं लोगों ने उसे पसंद भी किया.
लिपस्टिक अंडर माई बुर्का
स्त्रियों की छुपी हुई मन की भावनाओं को व्यक्त करने वाली एक बोल्ड कहानी जिसके अंदर अलग-अलग उम्र की 4 स्त्रियों की कहानियों को दिखाया गया. इसे भी लोगों ने बहुत पसंद किया. रत्ना पाठक.. कोंकणा सेन शर्मा..अहाना कुमरा और पल्बिता को इस फिल्म में खूब सराहा गया. हालांकि सेंसर बोर्ड ने पहले इस फिल्म को बैन कर दिया था लेकिन बाद में न्यायालय की दखल से यह फिल्म रिलीज हो पाई.
मोम एवं मातृ
माँ के ऊपर दो फिल्में रिलीज हुई. मोम एवं मातृ . दोनों में ही अभिनेत्रियों का प्रमुख रोल रहा . मातृ में रवीना टंडन नजर आई और दूसरी मॉम में श्रीदेवी. दोनों की एक्टिंग एवं प्रभावी डायलॉग अदायगी को भी लोगों ने बहुत पसंद किया. विशेष रुप से श्रीदेवी के जलवे तो इस फिल्म में देखने लायक थे. तो इस तरह से देखा जाए तो अभिनेत्रियों के द्वारा फिल्मों में अभिनीत रोल के कारण यह साल हीरोइनों के नाम रहा.

Jacqueline Fernandes said, forgetting dialogue see the Salman Khan's : जैकलिन फर्नांडीस ने कहा सलमान खान को देख कर भूल जाती हूं डायलॉग

जैकलिन फर्नांडीस इन दिनों सलमान खान के साथ फेस 3 फिल्म की शूटिंग में व्यस्त हैं. इस फिल्म में दोनों की केमिस्ट्री बहुत जबरदस्त लग रही है. इससे पहले किक में भी ये दोनों एक साथ कमाल कर चुके हैं और उनके फैंस ने इस जोड़ी को बेहद पसंद किया.
जैकलिन रेस 3 को लेकर काफी उत्साहित है और विशेष रूप से सलमान खान के साथ काम करने में उन्हें बड़ा मजा आता है. सलमान खान के साथ काम करने को लेकर जैकलीन ने कहा -मैं आज भी सलमान खान के साथ उनके फैंस की तरह काम करती हूं. इसलिए मैं जब भी उनके साथ स्क्रीन पर होती हूं तो मुझे एक बेचैनी सी होती है. उन्हें देखकर मैं अपने डायलोग भूल जाती हूं. उस समय ओ माय गॉड जैसी फिलिंग होती है. जैकलीन ने कहा कि सलमान खान ने मेरे कैरियर को एक नई ऊंचाई दी है और सबसे बड़ी बात इसके लिए उन्होंने कभी जताया नहीं है की 'किक' फिल्म उन्होंने दी है बल्कि यही कहा कि फिल्म मुझे अपनी वजह से मिली.
रेस 3 फुल एक्शन और जबरदस्त सस्पेंस वाली फिल्म है. इस फिल्म की खास बात यह होगी कि फिल्म में सभी किरदार नेगेटिव दिखाई देंगे जब तक की फिल्म का चरम बिंदु नहीं आ जाए. वहां जाकर इस फिल्म के कई रहस्य स्पष्ट होंगे की कौन पॉजिटिव है और नेगेटिव. इसलिए सभी के लिए यह फिल्म एक चैलेंज की तरह है. इस फिल्म में जैकलीन मिक्सड मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग ले रही है. रेस 3 अगले साल ईद पर रिलीज होगी. बॉलीवुड के बेहतरीन कोरियोग्राफर एवं डांसर रेमो डिसूजा इस फिल्म का निर्देशन कर रहे हैं. बॉबी देओल, अनिल कपूर, डेज़ी शाह और साकिब सलीम इस फिल्म के अन्य मुख्य किरदार है.

Saif Ali Khan drive a tractor Kareena Kapoor sitting on a side seat : सैफ अली खान ने चलाया ट्रैक्टर करीना कपूर को साइड सीट पर बैठा कर

सैफ अली खान एवं करीना कपूर इन दिनों हरियाणा के पटोदी में अपने बेटे तैमूर के जन्मदिन की तैयारियों में व्यस्त हैं. सैफ अली खान अपने पुस्तैनी मकान पटौदी महल में अपनी पूरी फैमिली के साथ 20 दिसंबर को होने वाले तैमूर के जन्मदिन के कार्यक्रम में व्यस्त दिखाई दे रहे हैं.
मुंबई की बेहद व्यस्त और भीड़ भाड़ भरी जिंदगी से दूर अभिनेता सैफ अली खान इन दिनों एक किसान के बेटे की तरह अपने पैतृक निवास स्थान पटौदी में ट्रैक्टर चलाते हुए दिखाई दिए. उनकी गोद में उनका बेटा तैमूर बैठा हुआ जो अपने मासूम हाथों से ट्रैक्टर का स्टेरिंग संभाल रहा है. बगल वाली सीट पर काला चश्मा लगाए हुए करीना कपूर बैठी हैं जो बेहद ही खूबसूरत लग रही हैं और दूसरी तरफ करिश्मा कपूर की बेटियां भी बैठ दिखाई दे रही हैं. सैफ अली खान की भांजी भी साथ में बैठी है.
सैफ अली खान जब भी पटौदी आते हैं वे पूरी मस्ती के साथ सैर सपाटा करते हुए अपनी खेती को संभालते हैं और घर से बाहर निकल जाते हैं घूमने के लिए. इससे पहले सैफ अली खान को महल से बाहर घुड़सवारी करते हुए देखा गया था. वहां भी वे अपने बेटे तैमूर और पत्नी करीना कपूर के साथ प्राकृतिक रूप का लुत्फ़ उठाने में मशगूल थे. ऐसा भी कहा जा रहा है कि वे अपनी आने वाली फिल्म 'एंटर' के रोल की तैयारियां भी महल में लगातार कर रहे हैं लेकिन फिलहाल तो वे अपने बेटे तैमूर के जन्म दिवस की तैयारियों में ज्यादा व्यस्त दिखाई दे रहे हैं.
 
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